यूक्रेन से लौट रहे फै़सल ने कमल के लिए कैंसल करवा ली टिकट, मिसाल है इन दोनों की दोस्ती

यूक्रेन से लौट रहे फै़सल ने कमल के लिए कैंसल करवा ली टिकट, मिसाल है इन दोनों की दोस्ती

रूस और यूक्रेन के बीच चल रही जंग  में न जाने कितनी ज़िन्दगियां तबाह हो गईं. यूक्रेन निवासी अपनी जान बचाकर अन्य देशों में शरण ले रहे हैं. यूक्रेन में पढ़ रहे कई भारतीय छात्रों को ऑपरेशन गंगा के तहत देश वापस लाया जा रहा है. ग़ौरतलब है कि यूक्रेन में एक छात्र, नवीन के मारे जाने और हरजोत सिंह नामक अन्य छात्र को गोली लगने की भी ख़बरें आई हैं. तमाम नफ़रतों के बीच दोस्ती और मोहब्बत की एक ऐसी ख़बर सामने आई है जो युद्ध की घड़ी में उम्मीद जगाती है.

दोस्ती की मिसाल

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के दो दोस्तों की कहानी न सिर्फ़ मिसाल हैं बल्कि यूं कहें कि फ़्रेंडशिप गोल्स हैं! यूक्रेन पर रूस के हमले से दो दिन पहले उत्तर प्रदेश के मोहम्मद फ़ैसल को घर वापस लौटने का मौका मिला. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मोहम्मद फ़ैसल, हापुड़ का रहने वाला है. बदक़िस्मती से फ़ैसल के दोस्त, वाराणसी के कमल सिंह को टिकट नहीं मिल पाया.

फ़ैसल ने कैंसल करवा लिया अपना टिकट

फ़ैसल और कमल की दोस्ती इतनी गहरी है कि फ़ैसल को अकेले घर जाना मंज़ूर नहीं था. वो शायद अपने दोस्त को युद्ध की परिस्थितियों के बीच अकेले छोड़कर आराम से घर वापस आना नहीं चाहता था. लिहाज़ा फ़ैसल ने भी अपना कन्फ़र्म टिकट कैंसल कर लिया और कमल के साथ यूक्रेन में ही रुकने का फ़ैसला किया.

मेडिकल के छात्र हैं फ़ैसल और कमल

मोहम्मद फ़ैसल और कमल सिंह यूक्रेन में कई अन्य भारतीय छात्रों के जैसे ही डॉक्टरी की पढ़ाई करने गए थे. दोनों इवानो फ़्रैंकविस्क नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी, में एमबीबीएस फर्स्ट ईयर के छात्र हैं. पिछले साल दोनों कीव हवाई अड्डे पर मिले और दोस्त बन गए. दोनों यूनिवर्सिटी हॉस्टल में भी साथ ही रहते थे.

 

फ़्रेंडशिप टेस्ट में टॉप कर गए दोनों दोस्त

IANS से बात-चीत में कमल सिंह ने बताया कि फ़ैसल और उसके विचार काफ़ी मिलते-जुलते हैं. दोनों ही पढ़ाई को लेकर बेहद सीरियस हैं. कमल के शब्दों में, ‘मैं ऊपरवाले का धन्यवाद करता हूं कि कॉलेज के दौरान मुझे ऐसा दोस्त मिला हम पढ़ाई और भविष्य पर बात-चीत करते हैं, इसी वजह से हमारी दोस्ती और मज़बूत हो गई.’

पढ़ाई को लेकर चिंतित हैं दोनों दोस्त

फ़ैसल ने बात-चीत में बताया कि पिछले साल 11 दिसंब को वो मेडिकल की पढ़ाई के लिए यूक्रेन पहुंचा. फ़ैसल के शब्दों में, ‘कीव एयरपोर्ट पर सभी इंतज़ार कर रहे थे, हम सभी को इवानो फ़्रैंकविस्क नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी जाना था. मैं उसी दौरान कमल से मिला और हम हॉस्टल में साथ रहने लगे.’

कमल ने फ़ैसल को लौटने को कहा, फ़ैसल नहीं माना

फ़ैसल ने आगे बताया, ‘मेरी टिकट जंग शुरु होने से दो दिन पहले बुक हो गई थी, मैंने जब कॉन्ट्रैक्टर से पूछा कि और किस-किस की टिकट बुक हुई है तो पता चला कि कमल को टिकट नहीं मिली. मैंने कमल के बिना भारत न लौटने का फ़ैसला किया. मेरे कॉन्ट्रैक्टर ने मुझे समझाया लेकिन मैंने उसकी बात नहीं मानी.’ फ़ैसल के परिवार ने उसे घर वापस आने को कहा, यहां तक कि कमल ने भी उसे चले जाने को कहा लेकिन फ़ैसल ने किसी की बात नहीं मानी.

[ डि‍सक्‍लेमर: यह न्‍यूज वेबसाइट से म‍िली जानकार‍ियों के आधार पर बनाई गई है. Lok Mantra अपनी तरफ से इसकी पुष्‍ट‍ि नहीं करता है. ]

Dhara Patel

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