गौरी तृतीया के दिन ऐसे पूजा करने से पूरी होगी हर मनोकामना, जानें शुभ मुहूर्त और महत्व

कल यानी 24 जनवरी 2023 को हरितालिका तीज व्रत है। यह गौरी तृतीया व्रत के नाम से भी जाना जाता है। हरतालिका तीज व्रत अविवाहित कन्याएं द्वारा अच्छे पति की प्राप्ति के लिये और विवाहित महिलाएँ अपने सौभाग्य में बढ़ोतरी के लिये करती है।

ऐसी मान्यता है कि इस व्रत को सबसे पहले माता पार्वती ने भगवान शंकर को पति के रूप में पाने के लिए किया था। इस दिन अपने सुख-सौभाग्य में बढ़ोतरी के लिये और एक अच्छे पति की प्राप्ति के लिये माता गौरी और भगवान शंकर की पूजा करनी चाहिए।

इस व्रत के दौरान सौभाग्यवती महिलाएं लाल वस्त्र पहनकर, मेहंदी लगाकर सोलह श्रृंगार करती हैं और शिव-पार्वती की विधिवत पूजा करती हैं।

शुभ मुहूर्त
तृतीया शुरू – 24 जनवरी सुबह 6 बजकर 20 मिनट पर शुरू

तृतीया तिथि खत्म – 25 जनवरी अगली सुबह 7 बजे खत्म

पूजा विधि

इस दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर नित्यक्रिया के बाद स्नानादि करें। इसके बाद व्रत का संकल्प करें।इस दिन देवी सती के साथ-साथ भगवान शंकर का पूजा करें।

पंचगव्य तथा चंदन निर्मित जल से देवी सती और भगवान शिव की प्रतिमा को स्नान कराएं।धूप, दीप, नैवेद्य तथा नाना प्रकार के फल अर्पित कर पूजा करें।पूजा के दौरान में श्री गणेश पर जल, रोली, मौली, चन्दन, सिन्दूर, लौंग, पान, चावल, सुपारी, फूल, इलायची, बेलपत्र, फल, मेवा और दक्षिणा चढ़ाएं।

गौरी की प्रतिमा को जल, दूध, दही से स्नान करा, वस्त्र आदि पहनाकर रोली, चन्दन, सिन्दुर, मेंहन्दी लगाएं। शिव-पार्वती की प्रतिमाओं का विधिवत पूजन करके गौरी तृतीया कि कथा सुनें। माता को सुहाग की सामग्री अर्पण करें।

रुद्राक्ष धारण करें

गौरी तृतीया को खास रुद्राक्ष धारण करें। रुद्राक्ष धारण करने से दिमागी परेशानी दूर होती है। वहीं इस दिन शिव पार्वती की पूजा करने से रोग ठीक हो जाते हैं और धन की कमी भी दूर होती है। इस दिन कालसर्प योग की शांति के लिए गौरी-शंकर रुद्राक्ष धारण करें।

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