लाखों की नौकरी छोड़ गुजरात का यह युवा कर रहा है हल्दी की ऑर्गेनिक खेती, सलाना 1.5 करोड़ का टर्नओवर

लाखों की नौकरी छोड़ गुजरात का यह युवा कर रहा है हल्दी की ऑर्गेनिक खेती, सलाना 1.5 करोड़ का टर्नओवर

आजकल कोविड-19 के समय में हर कोई इम्यूनिटी पावर की ही बात कर रहा है कि कैसे इम्यूनिटी पावर बढ़ाई जाए, जिससे हमारा शरीर रोगों से लड़ने में सक्षम हो सके? यही कारण है कि लोग आयुर्वेद की ओर ज़्यादा बढ़ रहे हैं तो वही कुछ लोग अपनी अच्छी खासी नौकरी छोड़ प्राकृतिक चीजों की खेती भी कर रहे हैं। इनमें से एक नाम है देवेश पटेल  का। नौकरी से इन्हें लाखों की आमदनी थी लेकिन इन्होंने अपने नौकरी छोड़ दी और कर रहे हैं अब ऑर्गेनिक खेती।

गुजरात के आणंद जिले के बोरियावी गाँव के रहने वाले देवेश पटेल ने IT से इंजीनियरिंग की है। इंजीनियरिंग करने के बाद इन्हें 1 लाख रुपए महीने की नौकरी मिली थी। लेकिन इन्हें अपनी नौकरी से ज़्यादा जैविक खेती में रुचि थी इसलिए देवेश ने अपनी नौकरी छोड़ कर प्राकृतिक चीजें जैसे हल्दी, अदरक, अश्वगंधा, नींबू, सब्जियाँ और अनाजों की खेती करना शुरू किए।

देवेश ने तो अब एक हल्दी कैप्सूल भी लॉन्च किया है, जिससे इम्यूनिटी पावर बढ़ने में मदद मिलती है। उनके प्रोडक्ट तो अब पूरे भारत के साथ-साथ अमेरिका, जर्मनी और फ्रांस तक पहुँच चुकी है। जैविक खेती से देवेश की सलाना आय 1.25 करोड़ तक पहुँच चुकी है।

देवेश किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं। इसलिए इन्हें खेती करने में अधिक परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ा। वह 4 वर्ष पहले से ऑर्गेनिक खेती की शुरुआत किए और आज 5 से 7 एकड़ की भूमि पर जैविक खेती कर रहें है। इन्होंने मार्च में जिस हल्दी कैप्सूल को लांच किया था इसके लिये उन्होंने हल्दी को प्रोसेस कर 150 तत्वों को सक्रिय किया है। देवेश का मानना है कि हम लोग जिस हल्दी का प्रयोग खाने में किया करते हैं उसके गुण सीमित हैं और प्रतिदिन हल्दी का सेवन नहीं करने से शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो जाती है। इसलिए इन्होंने अपने हल्दी कैप्सूल को लांच किया। फिलहाल तो यह कैप्सूल गुजरात तक ही सीमित है लेकिन आने वाले दिनों में पूरे भारत में इस कैप्सूल की सप्लाई की जाएगी।

देवेश ने बताया कि इस हल्दी कैप्सूल को बनाने के लिए उन्होंने 2 वर्षों तक रिसर्च एन्ड डेवलपमेंट पर काम करने के लिये आणंद कृषि यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों से सलाह और मार्गदर्शन लिया। जिसके बाद ही इस कैप्सूल को लांच किया गया। फिलहाल देवेश 5 हज़ार कैप्सूल का निर्माण कर रहे हैं।

देवेश ने ऑर्गेनिक हल्दी भी बनाया है जिसे आप आसानी से दूध में मिलाकर पिया जा सके और कई बीमारियों को दूर भगाया जा सके। इसका निर्यात देवेश यूरोप के कई देशों से कर रहे हैं। बहुत जल्दी से भारत के बाजारों में भी लॉन्च किया जाएगा। इसके पैकेजिंग और डिजाइनिंग का काम भी अहमदाबाद में शुरू हो चुका है। खासकर इसका निर्माण बच्चों को ध्यान में रखकर ही किया गया है।

फिलहाल देवेश पटेल से ग्रोफर और बिग बास्केट जैसी बड़ी-बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियाँ ऑर्गेनिक आलू के लिए उनसे संपर्क कर रही है। वह इन कंपनियों के साथ कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग भी बहुत जल्द शुरू करेंगे देवेश अपने जैविक खेती को बढ़ाने के लिए ज़्यादा से ज़्यादा ज़मीन खरीदने की प्लानिंग कर रहे हैं। फिलहाल तो उनके पास 35 बीघा ज़मीन है जिसमें से 10 बीघा ज़मीन पर वह ऑर्गेनिक खेती करते हैं।

देवेश पटेल ने बताया कि उनके प्रोडक्ट सत्त्व ऑर्गेनिक के नाम से अब बाजारों में नकली माल भी आने शुरू हो चुके हैं। इसलिए अब नकली माल से बचने के लिए पैकेट पर क्यूआर कोड छापने का निर्णय लिया गया है, जिसे स्कैन करते हैं देवेश पटेल का ऑफिशियल वेबसाइट खुल जाएगा। जिसके द्वारा ग्राहक उनके उत्पादों से सम्बंधित सारी जानकारियाँ हासिल कर सकेंगे।

देवेश ने जिन-जिन प्रोडक्ट्स को पेटेंट बनाया है जैसे हल्दी अदरक और हल्दी कैप्सूल ठीक उसी तरह से वह बोरियावी गाँव में उगने वाले पतरवेलिया पान के लिये जीआई (GI) टैग लगाने के लिए प्रयासरत हैं। इस पान से गुजरात में प्रसिद्ध रस बनाने के साथ-साथ पकोड़े और सब्जियाँ भी बनाए जाते हैं।

इस तरह हम बहुत कम समय में ही देवेश पटेल एक ख्याति प्राप्त ऑर्गेनिक फार्मर बन चुके हैं। यह फार्मिंग करने के साथ-साथ बहुत सारे किसानों को अपने साथ जोड़ते हैं और उन्हें जैविक खेती के लिए प्रोत्साहित करते हैं। जिसका सेवन करने से लोगों का स्वास्थ्य ठीक रहे और उन्हें दवाइयों का इस्तेमाल कम करना पड़े।

[ डि‍सक्‍लेमर: यह न्‍यूज वेबसाइट से म‍िली जानकार‍ियों के आधार पर बनाई गई है. Lok Mantra अपनी तरफ से इसकी पुष्‍ट‍ि नहीं करता है. ]

Dhara Patel

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