21 वर्षीय कैफ अली ने डिज़ाइन किया ऐसा चलता-फिरता घर, जिसमें नहीं होगा किसी वायरस का खतरा

दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय से आर्किटेक्चर की पढ़ाई कर रहे, 21 वर्षीय कैफ अली ने अपने छात्र जीवन में ही कुछ ऐसा कमाल कर दिखाया है, जिसे पूरी दुनिया सलाम कर रही है।

कैफ ने बीते साल कोरोना महामारी के दौरान, बड़े शहरों से पैदल चलकर अपने घर जाने को मजबूर मजदूरों और क्वारंटाइन सेंटर में लोगों को अपराधबोध के कारण भागते देखा था। इसी अनुभव के आधार पर, उन्होंने एक ऐसा शेल्टर होम डिजाइन किया, जिसे कहीं भी आसानी से शिफ्ट किया जा सकता है, जिसमें महामारी का खतरा नहीं होगा और सबसे खास बात यह है कि यह सस्ता होने के कारण, आम आदमी की पहुँच से बाहर नहीं होगा।

अली को इस पोर्टेबल डिजाइन के लिए प्रतिष्ठित डायना अवॉर्ड, अर्न्स्ट एंड यंग अवॉर्ड, कॉमनवेल्थ मिशन द्वारा सस्टेनेबल डेवलपमेंट अवार्ड जैसे कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। साथ ही, उनके आर्किटेक्चरल इनोवेशन को संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम द्वारा भी मान्यता दी गई है।

उन्हें कॉमनेवेल्थ मिशन के तहत अपने आर्किटेक्चरल इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए, 3 लाख रुपए भी दिए गए हैं। अली के इस डिजाइन को ग्लोबल स्टूडेंट अवॉर्ड के तहत टॉप-60 में भी चुना गया है और यदि वह इसे जीत जाते हैं, तो उन्हें सम्मान के रूप में 7 करोड़ रुपए मिल सकते हैं।बीते साल महाराष्ट्र के सोलापुर के रहने वाले रंजीत सिंह दिसाले ने ग्लोबल टीचर प्राइज जीतकर दुनिया में भारत का नाम रौशन किया था।

कैसे आया विचार

इस विषय में कैफ अली ने द बेटर इंडिया को बताया, “दरअसल, यह बात 2019 की है। तब मैं कॉलेज में थर्ड इयर का स्टूडेंट था। इस दौरान मैंने अपने सीनियर के साथ, युद्ध प्रभावित क्षेत्रों में शरणार्थियों के लिए, छत की समस्या को हल करने के लिए हाउसिंग शेल्टर को डिजाइन किया था। हालांकि, इस डिजाइन को चुना नहीं जा सका। लेकिन मैंने जो रिसर्च किया था, उससे इस विषय में मेरी रुचि और बढ़ गई।”

इसके बाद जब, 2020 में कोरोना महामारी शुरू हुई, तो अली ने सोचा क्यों न उसी रिसर्च को थोड़ा और आगे बढ़ाते हुए क्वारंटाइन शेल्टर का डिजाइन तैयार किया जाए। क्योंकि, उन्हें लगा कि दोनों की तकनीक लगभग एक जैसी है।

वह बताते हैं, “मैंने बीते साल मार्च-अप्रैल में इसी आइडिया के साथ अपने स्पेस इरा (Space Era) प्रोजेक्ट को शुरू किया। इसके तहत मेरा उद्देश्य महामारी के दौरान और उसके बाद, शेल्टर की समस्या को हल करना है।”

अली बताते हैं, “कोरोना महामारी के दौरान मैंने गौर किया कि यदि कोई घर में क्वारंटाइन हो रहा है, तो वह अपने पूरे परिवार और पड़ोसियों को खतरे में डाल रहा है। वहीं, उन्हें यदि सरकार किसी बड़े क्वारंटाइन सेंटर में जगह दे रही है, अधिक मरीजों के कारण खतरा और बढ़ जाता है। इस दौरान यदि कोई एक शख्स भी वायरस की चपेट में आ जाए, तो संक्रमण तेजी से बढ़ सकता है।”

“इसी को देखते हुए मैंने दोनों के बीच का रास्ता निकाला कि कोई क्वारंटाइन सेंटर में भी न रहे और घर में भी न रहे। मेरा डिजाइन ऐसा है कि इसे छोटे-छोटे कॉलोनियों में आसानी से लगाया जा सकता है। इस डिजाइन में वेंटिलेशन सिस्टम ऐसा है कि यदि कोई वायरस की चपेट में आ भी जाए, तो दूसरे को कोई खतरा नहीं रहता है। साथ ही घर के पास रहने से कोई गिल्ट भी महसूस नहीं होगा और वे कभी भागने की कोशिश भी नहीं करेंगे,” उन्होंने आगे बताया।

कैफ अली के अनुसार, इस फैसिलिटी में 24 लोगों को आसानी ने छत मिल सकता है। वह बताते हैं, “मैंने इस डिजाइन को इस तरीके से तैयार किया है कि इसका इस्तेमाल महामारी के बाद भी बाढ़, भूकंप, सुनामी जैसे कई अन्य प्राकृतिक आपदाओं के दौरान विस्थापितों के लिए अस्थाई आश्रय के तौर पर किया जा सकता है। साथ ही, महानगरों में रेन-बसेरों की समस्या भी सुलझाई जा सकती है।”

बता दें कि बाढ़, सूखा, तूफान, भूकंप जैसी आपदाओं के कारण भारत में हर साल 50 लाख से अधिक लोग विस्थापित होते हैं। इनमें असम, बिहार, केरल, उत्तराखंड जैसे कई राज्य काफी संवेदनशील हैं।

वहीं दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों में आश्रय की समस्या के कारण हजारों मजदूर रेन-बसेरों में जीवन जीने को मजबूर होते हैं और किराये पर घर लेने के कारण उनपर आर्थिक दवाब बढ़ता है।

जानिए डिजाइन के बारे में

अली कहते हैं, “मेरा इनोवेशन कोई मैटेरियल न होकर, एक डिजाइन है। जिसे बेकार शिपिंग कंटेनर के अलावा पफ पैनल, बांस जैसे प्री-फैब्रिकेटेड मैटेरियल से बनाया जा सकता है।”

वह बताते हैं, “एक शिपिंग कंटेनर 2.5 मीटर x 6 मीटर का होता है। मेरे डिजाइन में आठ कंटेनरों की जरूरत पड़ेगी। शिपिंग कंटेनर के आयामों को बदला नहीं जा सकता है और मैंने अपनी डिजाइन में उसी को इस्तेमाल किया है।”

इसमें ग्राउंड फ्लोर में चार कंटेनर जोड़े जाते हैं और फर्स्ट फ्लोर पर बाकी चार कंटेनर को 90 डिग्री रिवर्स करके जोड़ दिया जाता है। इस तरह नीचे वाले को छत मिल जाती है और ऊपर वाले को बालकनी। वह बताते हैं कि एक कंटेनर में मरीजों के लिए चार शौचालय बनाए जा सकते हैं।

अली बताते हैं, “यदि किसी शेल्टर होम में एक हजार लोग रह रहे हैं, तो उसमें एयर सर्कुलेशन के कारण, बीमारियों का खतरा काफी बढ़ जाता है। लेकिन, इसमें उन्होंने छत के अंदर बहुत सारे बॉल्स लगाने का फैसला किया है, ताकि एयर सर्कुलेशन कई भागों में बंट जाए। इसमें Dilution Ventilation के तहत हवा को कमरे से खिड़की की ओर निकलने के साथ ही, सोशल डिस्टेंसिंग का भी पूरा ध्यान रखा गया है, ताकि रिस्क कम से कम हो।”

वह बताते हैं कि आमतौर पर क्वारंटाइन सेंटरों में लोगों का टाइम ट्रेवल काफी ज्यादा होता है, लेकिन इसका स्पेस इरा का डिजाइन ऐसा है कि इसमें ग्राउंड फूटप्रिंट करीब 30 फीसदी तक कम हो सकता है। इसके अलावा, इसमें मरीजों को बालकनी के रूप में काफी खुली जगह भी मिलती है, जिससे उन्हें मानसिक मजबूती मिलती है।

कैफ अली के अनुसार, एक बेकार शिपिंग कंटेनर की कीमत 1 लाख से 1.2 लाख होती है। इस तरह, एक पोर्टेबल शेल्टर हाउस बनाने में तकरीबन 10 से 12 लाख का खर्च आएगा। इसलिए अली ने डिजाइन को बिजनेस टू गवर्नमेंट मॉडल के आधार पर तैयार किया है।

नाइजीरिया में चल रहा प्रोजेक्ट

कैफ अली बताते हैं, “अभी मैंने स्पेस इरा का सिर्फ डिजाइन तैयार किया है। मैं फिलहाल अपने कॉलेज में पांचवे साल में हूं। अपनी पढ़ाई पूरी होने के बाद, मैं इसका प्रोटोटाइप बनाना शुरू करूंगा। लेकिन, पिछले साल नाइजीरिया की एक कंपनी सिथन लागोस को मेरा डिजाइन काफी पसंद आया। इसी तर्ज पर वे लागोस शहर में एक मेडिकल सेंटर बना रहे हैं। जिसका करीब 40 फीसदी काम पूरा हो चुका है। उन्होंने मुझे स्पॉन्सर करने के लिए भी मंजूरी दी है।”

जैसा कि इस डिजाइन को स्थानीय स्तर पर उपलब्ध प्री-फैब्रिकेटेड मैटेरियल से बनाया जा सकता है। इससे संसाधनों के जुटाने के लिए कार्बन फुटप्रिंट को कम करने के साथ ही, लोकल इकोनॉमी को भी बढ़ावा मिल सकता है।

सैकड़ों प्रतियोगिताओं में लिया हिस्सा

कैफ अली बताते हैं कि उनका परिवार कंस्ट्रक्शन बिजनेस में है। उनके पिता उन्हें एक सिविल इंजीनियर के रूप में देखना चाहते थे, लेकिन अली ने कुछ रचनात्मक करने के लिए इंजीनयरिंग के बजाय आर्किटेक्चर को चुना।

वह बताते हैं, “कॉलेज में आने के बाद, मैने 300 से अधिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया है। इससे मुझे पता चला कि देश-दुनिया में क्या चल रहा है। स्पेस इरा जैसा इनोवेशन उसी का परिणाम है। मैं हमेशा अपने जुनून का पीछा कर, दुनिया की सेवा करना चाहता हूं।”

[ डि‍सक्‍लेमर: यह न्‍यूज वेबसाइट से म‍िली जानकार‍ियों के आधार पर बनाई गई है. Lok Mantra अपनी तरफ से इसकी पुष्‍ट‍ि नहीं करता है. ]

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Don`t copy text!