गांव-गांव जा कर बच्चों को Computer सिखाती है ये बस, हर सीट पर है लैपटॉप, सीख चुके हैं 1300 बच्चे

जैसे जैसे दुनिया आधुनिक होती गई वैसे वैसे कंप्यूटर का महत्व बढ़ता गया. अब तो ऐसा समय आ चुका है कि हर काम में कंप्यूटर की उपयोगिता बढ़ गई है. यही वजह है कि हर छात्र के लिए कंप्‍यूटर सीखना जरूरी हो गया है.

हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चे आज भी कंप्यूटर की शिक्षा प्राप्त नहीं कर पाते. लेकिन अगर देशभर में ग्रामोत्थान संसाधन केंद्र जैसी व्यवस्था हो जाए तो निश्चित ही सभी बच्चों को कंप्यूटर की शिक्षा मिलने लगेगी.

बस में सिखाते हैं मुफ़्त कंप्यूटर

ग्रामोत्थान संसाधन केंद्र एक बस के माध्यम से बच्चों को कंप्यूटर सिखा रही है. ये बस कोई आम बस नहीं है. इसके हर सीट पर लैपटॉप लगाया गया है. इस बस की मदद से गांव के हर बच्चे को मुफ़्त में कम्प्यूटर सिखाया जा रहा है.

हर सीट पर लगा है लैपटॉप

ग्रामोत्थान संसाधन केंद्र की संचालन समिति के अध्यक्ष सुधीर सिंह बताते हैं कि यह मिनी बस गांव-गांव तक पहुंचती है. गांव में पहुंचते ही बस का हॉर्न बजता है और बच्चे इकट्ठे हो जाते हैं.

बस में हर सीट पर एक लैपटॉप लगाया गया है. हर लैपटॉप से दो बच्चे कंप्‍यूटर की शिक्षा प्राप्त कर हैं. यह बस एक दिन में कम से कम तीन गांवों में जाती है. यहां बच्चे खुशी-खुशी कंप्‍यूटर सीखने के लिए आते हैं. बच्चों को कंप्यूटर की ये शिक्षा मुफ़्त में दी जाती है.

1300 बच्चे सीख चुके हैं कंप्यूटर

कंप्‍यूटर शिक्षक मनीष श्रीवास्तव ने बताया कि बच्चों को पूरे तीन महीने का प्रशिक्षण दिया जाता है. कोर्स पूरा होने के बाद बच्चों को कंप्‍यूटर एप्लीकेशन का बेसिक प्रमाणपत्र दिया जाता है. एक गांव के अच्छों को प्रमाणपत्र देने के बाद ये तय किया जाता है कि अब किस किस गांव में जाना है.

ग्रामोत्थान संसाधन केंद्र ने इस तरह अब तक 50 गांव में 1300 बच्चों को कंप्‍यूटर का प्रशिक्षण दिया है. उनका कहना है कि गांव के स्कूलों में कंप्‍यूटर सिखाने की व्यवस्था नहीं है. ऐसे में ज्यादातर कक्षा आठ से दसवीं तक के बच्चे मिनी बस तक प्रशिक्षण लेने आते है.

[ डि‍सक्‍लेमर: यह न्‍यूज वेबसाइट से म‍िली जानकार‍ियों के आधार पर बनाई गई है. Lok Mantra अपनी तरफ से इसकी पुष्‍ट‍ि नहीं करता है. ]

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