शतभिषा नक्षत्र में पैदा हुए लोग होते हैं रहस्यमयी, चाणक्य के समान होती है बुद्धि, इस क्षेत्र में लहराते हैं परचम

आकाशमंडल में स्थित 27 नक्षत्रों में से शतभिषा 24वां नक्षत्र है। इसका अर्थ होता है – सौ चिकित्सक। ये नक्षत्र अपने आप में बहुत-सी वस्तुओं को समा लेने की क्षमता रखता हैं।

इस नक्षत्र में नामकरण, मुण्डन, कोई नया सामान खरीदना और विद्या आरंभ करना बेहद ही शुभ माना जाता है। आपको बता दूं कि शतभिषा नक्षत्र के स्वामी राहु है, जो एक छाया ग्रह है और इसकी राशि कुंभ है, यानी इसके चारों चरण कुंभ राशि में ही आते हैं।

शतभिषा नक्षत्र के प्रबल प्रभाव में आने वाले जातक साहसी, सदाचारी, धार्मिक, चतुर, रहस्यमयी और आत्मविश्वास से भरपूर होते हैं। इसके अलावा शतभिषा नक्षत्र का प्रतीक चिन्ह खाली वृत्त या गोलाकार आकृति को माना जाता है, जबकि पेड़-पौधों में इसका संबंध कदंब के पेड़ से बताया गया है।

अत: जिन लोगों का जन्म शतभिषा नक्षत्र में हुआ है उन लोगों को आज के दिन शतभिषा नक्षत्र के दौरान कदंब के पेड़ की उपासना करनी चाहिए। अगर आपको कदंब का पेड़ न मिले तो अपने मन में ही हरे भरे कदंब की आकृति का ध्यान करें। साथ ही कदंब के पेड़, उसकी लकड़ी या उससे जुड़ी किसीभी अन्य चीज़ को आज के दिन नुकसान नहीं पहुँचाना चाहिए। आज के दिन ऐसा करने से जीवन में आपकी तरक्की सुनिश्चित होगी।

शतभिषा एक पंचक नक्षत्र है। धनिष्ठा से लेकर रेवती तक के पांच नक्षत्रों को पंचक नक्षत्र कहा जाता है। पंचक की क्षेणी में शतभिषा दूसरा पंचक है।

पंचक के दौरान घर में लकड़ी का कार्य या घर में Wood work नहीं कराना चाहिए और ना ही लकड़ी इकट्ठी करनी चाहिए। अगर आप यह कार्य इस समय करेंगे तो यह अच्छा नहीं माना जाता। अतः 27 जनवरी शाम 6 बजकर 37 मिनट तक आपको इन सब बातों का ध्यान रखना चाहिए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Don`t copy text!