बॉलीवुड फिल्मों में अलग-अलग तरह से दिखाई गई नेताजी की जिंदगी

महान स्वतंत्रता सेनानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने कम आयु में ही समझ लिया था कि जब तक देशवासी एकजुट होकर अंग्रेजों का विरोध नहीं करेंगे, देश को अंग्रेजों की गुलामी से मुक्ति नहीं मिलेगी।

उन्होंने आत्मविश्वास, कल्पनाशीलता और नवजागरण के बल पर युवाओं में देश की स्वाधीनता का शंखनाद किया था। नेताजी के लिए देश की स्वाधीनता ही उनके जीवन का लक्ष्य बन गई थी।

यही वजह है कि नेताजी का असाधारण जीवन सिनेमा जगत में सदा से अत्यधिक उत्सुकता जगाता रहा है। कई फिल्म निर्माताओं ने उन्हें सेल्युलाइड पर जीवंत करके उनकी विचारधाराओं और अंग्रेजों के खिलाफ लड़ने के तरीकों के साथ न्याय करने की कोशिश की है।

इस क्रम में रमेश सहगल द्वारा वर्ष 1950 में निर्देशित फिल्म ‘समाधि’ स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष और प्रमुख तौर पर नेताजी सुभाष चंद्र बोस की विचारधाराओं और राजनीतिक विचारों को चित्रित करती है।

इस फिल्म की शुरुआत में सूत्रधार कहता है कि भारत अपने सपूतों को कभी नहीं भूल सकता और हमारी कहानी भी भारत के एक बहुत महान लाल नेताजी सुभाष चंद्र बोस से शुरू होती है।

ब्रिटिश जेल की सलाखों को तोड़कर नेताजी सिंगापुर पहुंचे थे और स्वाधीनता की जंग शुरू करने से पहले उन्होंने महात्मा गांधी से आशीर्वाद मांगा था।िफल्म की शुरुआत नेताजी के भाषण और विचारधारा को दिखाने से ही होती है। यह फिल्म सीधे तौर पर नेताजी के जीवन के इर्द-गिर्द ही नहीं,

बल्कि आजाद हिंद फौज के एक सैनिक के भी इर्द-गिर्द रही है, जो देश की स्वाधीनता के लिए अपने प्यार तक को बलिदान कर देता है। इस फिल्म में अशोक कुमार व नलिनी जयवंत प्रमुख भूमिका में थे।

वहीं वर्ष 1966 में प्रदर्शित पीयूष बोस निर्देशित बांग्ला क्लासिक फिल्म ‘सुभाष चंद्र’ हमें नेताजी सुभाष चंद्र बोस के आदर्शों के विकास और भारत की स्वाधीनता के लिए तैयार एक उग्र राजनीतिक कार्यकर्ता के रूप में उभरते हुए दिखाती है।

यह सुभाष चंद्र बोस के बचपन, उनके कालेज के वर्षों और भारतीय सिविल सेवा परीक्षा के साथ उनके अनुभव व देश के प्रति प्रेम को बहुत खूबसूरती से दर्शाती है। फिल्म में समर कुमार ने वयस्क सुभाष चंद्र बोस की भूमिका निभाई थी।

इसके उपरांत एक लंबे अंतराल के बाद सुभाष चंद्र बोस पर फिल्म आई। वर्ष 2004 में प्रख्यात फिल्ममेकर श्याम बेनेगल नेिफल्म ‘नेताजी सुभाष चंद्र बोस: द फारगाटन हीरो’ का निर्देशन किया, जिसमें मुख्य भूमिका में सचिन खेडेकर ने अभिनय किया था।

जीशु सेनगुप्ता (सिसिर बोस के रूप में), दिव्या दत्ता (इला बोस के पात्र में) ने इस बायोपिक में अन्य महत्वपूर्ण किरदार निभाए। यह फिल्म घर में नजरबंद सुभाष चंद्र बोस के भारत छोड़ने और आजाद हिंद फौज के गठन को लेकर सुभाष चंद्र बोस की मृत्यु जैसे विभिन्न पहलुओं का चित्रण करती है।िफल्म ‘नेताजी सुभाष चंद्र बोस: द फारगाटन हीरो’ में सचिन खेडेकर का अिभनय खासा पसंदिकया गया था

फिल्मों के अलावा नेताजी सुभाष चंद्र बोस पर वेब सीरीज व टीवी सीरीज भी बनीं। निर्माता एकता कपूर ने वेब सीरीज ‘बोस: डेड/अलाइव’ का निर्माण किया। लेखक अनुज धर की किताब ‘इंडियाज बिगेस्ट कवर-अप’ पर आधारित यह वेब सीरीज इस संभावना को संबोधित करने की कोशिश करती है कि ताइवान विमान दुर्घटना में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मृत्यु नहीं हुई थी।

वेब सीरीज में राजकुमार राव ने शीर्षक भूमिका निभाई। जिसमें राजकुमार ने अपने किरदार के साथ बखूबी न्याय करने की कोिशश की। नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मृत्यु आज तक चर्चा का विषय है। जिसे दर्शाने में फिल्ममेकर्स की खासी दिलचस्पी रही है।

वर्ष 2019 में श्रीजित मुखर्जी निर्देशित बांग्ला फिल्म ‘गुमनामी’ उन परिस्थितिजन्य साक्ष्य की पड़ताल करती है कि गुमनामी बाबा ही नेताजी सुभाष चंद्र बोस हैं। फिल्म में तीन अलग-अलग थ्योरी पर बात की गई है कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस के साथ क्या हुआ होगा।

फिल्म में प्रोसेनजीत चटर्जी अहम भूमिका में हैं। इसी क्रम में वर्ष 2019 में बांग्ला टेलीविजन शृंखला ‘नेताजी’ भी सुभाष चंद्र बोस के बचपन और युवावस्था को दिखाती है।

यह इस बात की भी पड़ताल करती है कि कैसे सुभाष चंद्र बोस महान स्वतंत्रता सेनानी के रूप में विकसित हुए। इसमें अभिषेक बोस ने नेताजी की भूमिका अभिनीत की थी

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