माँ करती थी लोगों के घरों में काम, दिन-रात मेहनत कर बेटे को पढ़ाया, आज बन गया फोर्ड में इंजीनियर

माँ करती थी लोगों के घरों में काम, दिन-रात मेहनत कर बेटे को पढ़ाया, आज बन गया फोर्ड में इंजीनियर

एक सफल व्यक्ति बनने का सपना हर कोई देखता है परंतु सभी लोगों को सफलता नहीं मिल पाती है। कामयाब होने के लिए व्यक्ति को अपने जीवन में बहुत से उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ता है। ज्यादातर ऐसा होता है कि लोग अपनी गरीबी के चलते हार मान जाते हैं। अपनी परिस्थितियों के आगे लोग टूट जाते हैं परंतु ऐसा नहीं है कि गरीब लोग सफलता नहीं प्राप्त कर सकते। ऐसा कहा जाता है कि कामयाबी किसी की मोहताज नहीं होती है। अगर इंसान में कुछ करने का जज्बा है और लगातार मेहनत करता है तो उसको एक ना एक दिन सफलता अवश्य मिलती है।

आज हम आपको इस लेख के माध्यम से उदयपुर के भावेश लोहार की कहानी बताने वाले हैं। भावेश लोहार ने अपने सपनों की नौकरी पाने के लिए सभी बाधाओं को तोड़ दिया और आज वह कार बनाने वाली फोर्ड कंपनी में इंजीनियर बन गया है। हालांकि, भावेश लोहार के लिए यह मुकाम पाना इतना आसान नहीं था परंतु इसके लिए उनकी मां ने सबसे बड़ा त्याग किया है। भावेश लोहार की मां सालों से लोगों के घरों में झाड़ू-पोछा और बर्तन मांजकर अपने बेटे को पढ़ाया।

आपको बता दें कि भावेश लोहार राजस्थान के उदयपुर के रहने वाले हैं। उनकी मां लोगों के घरों में घरेलू काम किया करती थीं। मां ने अपने बेटे को दिन रात मेहनत कर पढ़ाया और मां का त्याग आखिर में रंग लाया है। आज बेटे ने फोर्ड कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर की नौकरी प्राप्त कर ली है। उन्होंने लिंक्डइन पर अपनी सफलता की कहानी साझा की है, जो सोशल मीडिया पर काफी तेजी से वायरल हो रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस पोस्ट में भावेश लोहार ने अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए यह लिखा है कि “मुझे आज भी वह दिन याद है, जब हाईवे पर हम नंगे पैर लू के बीच में सरकारी स्कूल जाते थे। मैं और मेरे दोस्त फ्यूचर की कारों के बारे में विचार-विमर्श करते थे और यह कहते थे कि एक दिन बड़ा आदमी बनने पर यह कार खरीदेंगे। उन दिनों मुझे फोर्ड फीगो से बड़ा प्यार था। मैंने वह लो’कल न्यूज़ पेपर में देखी थी और पैसा आने पर मैं उसे खरीदना चाहता था।

भावेश ने यह बताया है कि “वह भोपाल में नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में पढ़ते थे। वहां का हॉस्टल उन्हें छोड़ना पड़ा क्योंकि वह कोरोना महामारी के दौरान अपने परिवार के अन्य 7 सदस्यों के साथ एक 6 बाय 6 के कमरे में रहते थे। हमारे पास एक ही कमरा था, इसमें ही मैंने अपने पढ़ने और इंटरव्यू देने के लिए एक हिस्सा बना लिया था।” उन्होंने आगे बताया कि “मैं काफी सौभाग्यशाली हूं कि मैंने कई बड़ी कंपनियों का इंटरव्यू इसी कमरे से दिया और मैं फोर्ड में सिलेक्ट हो गया।”

भावेश लोहार अपनी सफलता का श्रेय अपनी बड़ी बहन और मां को देते हैं। उन्होंने बताया कि उनकी मां इन लोगों के घरों में काम करती हैं। उनके पिता महीने में ₹7000 रूपए तक कमाते थे। इसी वजह से कर्ज उतारने के लिए परिवार के अन्य सदस्यों को भी नौकरी करनी पड़ी थी। भावेश लोहार ने यह भी बताया है कि अपना काम ईमानदारी से करते रहो और सकारात्मक सोचते रहो, क्योंकि भगवान के पास आपके लिए बेहतर योजनाएं हैं।

[ डि‍सक्‍लेमर: यह न्‍यूज वेबसाइट से म‍िली जानकार‍ियों के आधार पर बनाई गई है. Lok Mantra अपनी तरफ से इसकी पुष्‍ट‍ि नहीं करता है. ]

 

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