ज्योतिषी ने कहा नहीं बन पाओगे IAS, मेहनत की, बीमारी को हराया और अफसर बनकर दिखाया

ये भी नहीं कहा जा सकता कि किस्मत का लिखा झूठा होता है. लेकिन ये जरूर कहा जा सकता है कि कई बार किस्मत खुद ये कहती है कि मेहनत करो और मेरे लिखे को झुठला दो. इंसान अपने जज्बे और जुनून से कठिन से कठिन लक्ष्य को पा सकता है. इरादे पक्के हों तो किसी नजूमी की बात भी झुठलाई जा सकती है. इस बात को साबित किया है आईएएस ऑफिसर नवजीवन पवार ने.

महाराष्ट्र के नासिक जिले के नवीबेज गांव में पैदा हुए नवजीवन के पिता किसान और मां प्राइमरी स्कूल टीचर हैं. उन्होंने सिविल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की है. 27 मई 2017 को अपनी डिग्री पूरी करने के बाद नवजीवन 27 जून को यूपीएससी की तैयारी के लिए दिल्ली आ गए. 3 जून 2018 को यूपीएससी की प्रारम्भिक परीक्षा हुई, जो उन्होंने अपने पहले ही प्रयास में पास कर ली.

नवजीवन के लिए अपने लक्ष्य तक पहुंचना आसान नहीं था. एक के बाद एक उन्हें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा. ऐसा लग रहा था जैसे कोई उन्हें आगे बढ़ने से रोक रहा है. कभी उन्होंने डेंगू व डायरिया हुआ, तो कभी कुत्ते ने काट लिया. कभी उनका फोन खो गया. तो कभी ज्योतिषी ने हाथ देखकर कहा कि 27 की उम्र तक आईएएस बन नहीं पाएंगे. इधर नवजीवन ना तो किसी समस्या से डरे और ना ही हाथों की लकीरों पर विश्वास किया. वह बस अपनी मेहनत करते रहे और आगे बढ़ते रहे.

यूपीएससी की मुख्य परीक्षा से 28 दिन पहले नवजीवन डेंगू की चपेट में आ गए. बिगड़ती हालत देख कर उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया गया. दिल्ली के अस्पताल में उनकी हालत में किसी तरह का सुधार नहीं दिख रहा था. ऐसे में नवजीवन अपने घर नासिक चले गए. यहीं पर उनका फिर से इलाज होने लगा. हालात इतनी बिगड़ गई कि उन्हें आईसीयू में भर्ती करना पड़ा. ये सब तब हो रहा था जब उनकी मुख्य परीक्षा में केवल 26 दिन बचे थे.

आईसीयू में भर्ती नवजीवन को उनके पिता ने कहा कि अब उसके सामने दो रास्ते हैं. या तो वो रोते रहें या फिर लड़ें. नवजीवन ने तय किया कि वह लड़ेंगे. उन्होंने इस लड़ाई की शुरुआत अस्पताल की नर्स से ही कर दी. नवजीवन ने उससे कहा कि मुझे अपने राइट हैंड से नौ पेपर लिखने हैं. चाहे सारे इंजेक्शन लेफ्ट हैंड में लगा दो, मगर मेरे राइट हैंड को कुछ भी नहीं होना चाहिए.

इसके बाद जो नवजीवन ने किया उसे देख कर डॉक्टर तक हैरान रह गए. आईसीयू में भर्ती नवजीवन के एक हाथ में दवा की बोतल चढ़ाई जा रही थी और उनके दूसरे हाथ में यूपीएससी की किताब थी. साइड में पड़ी किताबों को देख डॉक्टर ने कहा कि परीक्षा से बड़ी जिंदगी है. परीक्षा तो फिर भी दे सकते हो, मगर नवजीवन नहीं माने और अस्पताल में ही पढ़ते रहे.

नवजीवन बीमारियों से जीत गए और परीक्षा दे दी. उन्होंने अपने ऊपर सहे हर कष्ट का बदला ले लिया था. अपने पहले ही प्रयास में उन्होंने यूपीएससी परीक्षा पास कर ली. यूपीएससी 2018 में नवजीवन विजय पवार ने ऑल इंडिया 360वीं रैंक हासिल की और आईएएस बन गए.

[ डि‍सक्‍लेमर: यह न्‍यूज वेबसाइट से म‍िली जानकार‍ियों के आधार पर बनाई गई है. Lok Mantra अपनी तरफ से इसकी पुष्‍ट‍ि नहीं करता है. ]

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