ट्रांसजेंडर राजकुमारी: अनाथ बच्चों की मां, बेसहारा लड़कियों का सहारा, 75% कमाई कर देती हैं दान

दुनिया में इंसान तो बहुत तरह के हैं, जो अपने-अपने तरीके से जीवन जी रहे हैं. किन्तु, वो जो औरों से अलग हैं. उनके लिए ये ज़िंदगी किसी जंग के मैदान से कम नहीं है. इसका बड़ा उदाहरण हैं, ट्रांसजेंडर.

जी हां! वही ट्रांसजेंडर जो शादी या बच्चे के जन्म जैसे शुभ अवसर पर, ट्रेनों में नाचते गाते हुए आपसे पैसे मांगते हैं. आपके सामने हंसते हैं, शरारत करते हैं, ठहाके लगाते हैं, लेकिन अंदर ही अंदर ये घुट रहे होते हैं. घुटें भी कैसे ना, कभी किसी का स्नेह जो नहीं मिला. समाज क्या इन्हें तो खुद के परिवार वालों ने ठुकरा दिया.

फिर भला ये और किसी से क्या उम्मीद करते ऐसे में इनकी ज़िंदगी कितनी कठिन हो जाती है इसका अंदाज़ा लगाना भी मुश्किल है. अब सोचिए जिसके लिए अपनी ज़िंदगी मुश्किल है, वो अगर दूसरों का सहारा बन जाए तो ये सुन कर हैरानी होगी ही. ट्रांसजेंडर राजकुमारी एक ऐसी ही नाम हैं!

वो अनाथ बच्चों की मां है. बेसहारा लड़कियों का सहारा है. यही नहीं गरीबों के लिए वो अपनी 75% कमाई दान कर देती हैं. कोरोना काल में भी राजकुमारी गरीबों की सेवा करती दिखीं. ऐसे में उन्हें नज़दीक से जानना प्रेरक रहेगा. तो चलिए आज आपको ट्रांसजेंडर राजकुमारी से मिलवाते हैं:

ट्रांसजेंडर राजकुमारी को क्या खास बनाता है?

झारखंड बोकारो के रितुडीह की रहने वाली ट्रांसजेंडर राजकुमारी अन्य ट्रांसजेंडर्स की तरह लोगों के घर खुशी के मौके पर जाती हैं. नाचती हैं, गाती हैं और अपना नेग लेकर आती हैं. बस इनमें एक अंतर है, जो इन्हें दूसरों से अलग बनता है. वो है राजकुमारी की दरियादिली. कोई भी ज़रूरतमंद उनके यहां से खाली हाथ नहीं लौटता. खुद दूसरों से मांग कर अपना जीवन चलाने वाली राजकुमारी दूसरों के लिए समर्पित हैं.

वैसे तो ये जग जाहिर है कि ट्रांसजेंडर कभी संतान सुख प्राप्त नहीं कर सकते, लेकिन राजकुमारी के संबंध में ये बात झूठी पड़ जाती है. वो एक नहीं, बल्कि 8 बच्चों की मां हैं. भले ही उन्होंने इन्हें जन्म नहीं दिया, मगर इनका पालन-पोषण उन्होंने अपने बच्चों की तरह ही किया है.

दुनिया के लिए मिसाल बन चुकी राजकुमारी महज 10 साल की थी, जब उन्हें अपना घर छोड़ना पड़ा था. ट्रांसजेंडर होने के कारण उनके पिता ने उन्हें घर से बाहर निकाल दिया था. उसके बाद कभी उनके परिवार ने ये भी जानने की कोशिश नहीं की कि राजकुमारी किस हाल में अपनी ज़िंदगी काट रही हैं.

खैर, वो कहते हैं ना कि इंसान ऐसी सख्त जान है, जो परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढाल लेता है. राजकुमारी ने भी खुद को उस माहौल में ढाल लिया, जहां ज़िंदगी ने उसे धकेल दिया था. इस बीच वह दो चीज़ें नहीं भूलीं. पहला अपना दर्द और दूसरी अपनी नेकदिली. बड़े होकर उन्होंने उन बच्चों को अपनाना शुरू कर दिया, जिन्हें ज़िंदगी उनकी तरह ही सड़क पर ले आई थी.

दरअसल, वो नहीं चाहती थीं कि जो तकलीफें उन्हें साहनी पडीं वो ये बच्चे भी सहें. इस तरह एक ट्रांसजेंडर 8 बेसहारा बच्चों की मां बन गई. राजकुमारी ने जिन 8 लावारिस बच्चों को गोद लिया था, उनमें 5 लड़कियां थीं. राजकुमारी इन पांचों लड़कियों की शादी अच्छे घर में करवा चुकी हैं, जहां ये सब खुश हैं.

अपनी 75% कमाई गरीबों को कर देती हैं दान!

आगे वक्त के साथ-साथ राजकुमारी आगे बढ़ती रहीं और लोगों के लिए काम करती रहीं. उनके आसपास रहने वाले लोगों की मानें तो राजकुमारी अपनी कमाई का 75% हिस्सा ज़रूरतमंदों की मदद में लगा देती हैं. अपने गोद लिए बच्चों की परवरिश और उनकी शादी करने के अलावा राजकुमारी ने करीब 1000 लड़कियों की शादी करवाने में बड़ी मदद की है.

राजकुमारी लोगों की खुशियों में जाकर नाचती-गाती हैं, जिसके बदले उन्हें पैसे और गहने मिलते हैं. इन्होंने लोगों की तरफ से मिले गहने उन लड़कियों को भेंट में दे दिए, जो आर्थिक रूप से कमज़ोर थीं. हालांकि, लोगों की मदद करना और अनाथ बच्चों को पालने जैसा नेक काम करना भी राजकुमारी के लिए आसान नहीं रहा. इन्हें अपने ही समाज का कड़ा विरोध सहना पड़ा.

दरअसल, ट्रांसजेंडर समाज में अपना परिवार रखने की मनाही है. लेकिन राजकुमारी का अपना परिवार है इसके साथ यह अन्य लोगों की मदद भी करती हैं, जोकि ट्रांसजेंडर समाज के नियमों के खिलाफ है. इसी वजह से ट्रांसजेंडरसमाज ने राजकुमारी का विरोध किया. ट्रांसजेंडर आपस में शहर की गलियां बांट लेते हैं. किसी एक ट्रांसजेंडरकी गली में दूसरा ट्रांसजेंडर नहीं जा सकता.

राजकुमारी की भी गली थी, लेकिन इस विरोध के कारण इनसे इनकी गली भी छीन ली गई. इतना कुछ सहने के बाद भी राजकुमारी अपने उसूलों पर अडिग रहीं. राजकुमारी मानती हैं कि उनकी गुरू दुलाली ट्रांसजेंडर ने उन्हें सिखाया था कि हमेशा असहाय लोगों की सहायता करनी चाहिए. वो उन्हीं के बताए रास्ते पर चल रही हैं. इसके लिए उन्हें चाहे जितना विरोध सहना पड़े वो सहेंगी.

कोरोना काल में भी जारी है लोगों की सेवा

हम सब जानते हैं कि इस कोरोना काल ने दुनिया की आर्थिक व्यवस्था की कमर तोड़ दी है. मध्यवर्गीय परिवार तो इससे कुछ ज़्यादा ही त्रस्त है. कई जगहों पर ऐसा है कि गरीब लोगों के लिए दो वक्त की रोटी जुटाना भी आफत की बात हो गई है. ऐसे में आम इंसान किसी की कितनी मदद कर पाएगा भला, लेकिन राजकुमारी ट्रांसजेंडर इस अकाल के काल में भी लोगों की मदद करने से पीछे नहीं हटीं.

उन्होंने गरीब लोगों की भूख मिटाने के लिए 1 लाख का अनाज बांट दिया. इसी के साथ लोगों में कपड़े भी बांटे. हालांकि, राजकुमारी कहती हैं कि अब उनकी खुद की आर्थिक स्थिति भी सही नहीं है, लेकिन इसके बावजूद भी वह हर रोज़ 20 लोगों का पेट भरती हैं. आफत के समय में लोगों की मदद करना, ठंड में ज़रूरतमंदों को कंबल बांटना इन सबसे राजकुमारी को सुकून मिलता है.

राजकुमारी की इसी सेवा भावना ने लोगों के दिल में उनके प्रति सम्मान को बनाए रखा है. हम सब जानते हैं कि लोग एक ट्रांसजेंडर को किस नज़रिए से देखते हैं और उनके साथ कैसा व्यवहार करते हैं, लेकिन राजकुमारी की बात ही अलग है. लोग इनकी दिल से इज़्ज़त करते हैं. जिन 8 बच्चों को राजकुमारी ने गोद लिया है. वे सब इन्हें मम्मी कह कर बुलाते हैं.

ये रिश्ता केवल कहने भर का ही नहीं है. राजकुमारी और बच्चों ने इसे दिल से निभाया है. राजकुमारी अपनी पांचों बेटियों की शादी कर के उनका घर बसा चुकी हैं. अब इनके तीन बेटे हैं. राजकुमारी ने बड़े बेटे की शादी कर दी है. वहीं बीच वाला बेटा 10वीं कक्षा में पढ़ता है तथा सबसे छोटा अभी मात्र 7 महीने का है. राजकुमारी का 10वीं में पढ़ रहा बेटा शुभम अपनी मां की तरह एक समाजसेवी बनना चहता है.

वाकई! राजकुमारी ट्रांसजेंडर उन सभी के लिए प्रेरणा हैं, जो लोगों की मदद करने की इच्छा तो रखते हैं, लेकिन फिर अपने हालातों की ओर देख कर चुप्पी साध लेते हैं. राजकुमारी की कहानी बताती है कि अगर आप किसी की मदद करना चाहते हैं तो उसके लिए आपका अमीर होना ज़रूरी नहीं, बल्कि जरूरी है आपका दिल बड़ा होना.

[ डि‍सक्‍लेमर: यह न्‍यूज वेबसाइट से म‍िली जानकार‍ियों के आधार पर बनाई गई है. Lok Mantra अपनी तरफ से इसकी पुष्‍ट‍ि नहीं करता है. ]

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