बस्तर में बनी बांस की ये साइकिल सामान्य साइकिल से 60% हल्की है, पर्यावरण के भी लिए बेहतर

छत्तीसगढ़ के बस्तर को माओवादी गतिविधियों के लिए ही देश-दुनिया में जाना जाता है. लेकिन, अब वहां भी चीजें तीजे से बदल रही हैं. इसका उदाहरण है बंबूका. जगदलपुर के कुछ इनोवेटिव लोगों ने बांस, लोहे, जूट और बेल मेटल से इसे तैयार किया है.

इस प्रोजेक्ट के को-फाउंडर आशिफ खान न्यू इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए कहते हैं, हमने यहां जीविका चलाने के लिए एक आइडिया जनरेट किया. यहां के ट्राइबल कम्युनिटीज के हैंडीक्राफ्ट को प्रमोट किया. ट्राइबल्स सामान्य तौर पर वे काम करते हैं, जिसमें उनके पूर्वज भी जुड़े रहते हैं. हैंडीक्राफ्ट भी इसमें एक क्षेत्र है.

बंबूका का वजन 8.2 किग्रा है. यह सामान्य साइकिल से 60% हल्की है. इसका वजन सिर्फ 18 किग्रा है. अफ्रीका में बांस की साइकिल का एक सफल मॉडल दुनिया ने देखा है, अब बारी बस्तर की साइकिल की है.

ये है दाम

हमने कई तरह से साइकिल ओरिएंटेड डिजाइन पर फोकस किया. यह मेटल की तुलना में ज्यादा फ्लेक्सिबल है. हमारा अगला टार्गेट है कि हम महिलाओं को फोकस करके साइकिल बनाएं. इसके दाम के बारे में वह कहते हैं, इस प्रोजेक्ट का दाम 35 हजार है.

[ डि‍सक्‍लेमर: यह न्‍यूज वेबसाइट से म‍िली जानकार‍ियों के आधार पर बनाई गई है. Lok mantra से इसकी पुष्‍ट‍ि नहीं करता है.]

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