पॉलिटेक्निक कॉलेज के 19 वर्षीय छात्र ने लॉकडाउन में एक स्वचालित टी-कप वॉशिंग मशीन का किया निर्माण और पेटेंट कराया।

पॉलिटेक्निक कॉलेज के 19 वर्षीय छात्र ने लॉकडाउन में एक स्वचालित टी-कप वॉशिंग मशीन का किया निर्माण और पेटेंट कराया।

पालनपुर पॉलिटेक्निक कॉलेज के 19 वर्षीय छात्र ने अहमदाबाद एलडी इंजीनियरिंग कॉलेज के मार्गदर्शन में एक स्वचालित टी-कप वॉशिंग मशीन बनाई और इसका पेटेंट कराया। भारत में पहली बार किसी होनहार छात्र को हाई प्रेशर पानी और ब्रश से मशीन बनाने की स्टडी के साथ स्टार्टअप मिला है। धनेरा तालुका के भाटिया गांव के मूल निवासी धवल नाई ने मौजूदा स्थिति को ध्यान में रखते हुए एक टी-कप वॉशिंग मशीन बनाई है।

धवल ने अपने स्टार्ट-अप का नाम “महंतम” रखा है।धवल वर्तमान में “एसएस गांधी सूरत” में बीई की पढ़ाई कर रहे हैं। पालनपुर में पढ़ाई के दौरान साहू ऑटोमेटिक टचलेस वाशिंग मशीन बना कर हैरान रह गए. धवल ने कहा, “टी-कप वॉशिंग मशीन समय और श्रम की बचत करती है लेकिन स्वचालित होने से शुद्धता, स्वच्छता और अधिकतम पानी की बचत होती है। यह स्टार्टअप सरकार की स्टूडेंट स्टार्ट-अप और इनोवेशन पॉलिसी एसएसआईपी के तहत हो रहा है।

कई होटलों के अंदर का सर्वे करने पर पता चला कि किसी भी तरह के कप के इस्तेमाल से गंदगी और गंदगी ही निकलती है। एक स्वचालित तंत्र बनाना जिसका उपयोग हर कोई कर सके। कपों को उच्च दाब वाले पानी और ब्रश से धोया जाता है।यह मशीन 16 कप बहुत तेजी से और साथ ही साथ धो सकती है जिसके अंदर बहुत कम पानी का उपयोग होता है। भारत में कोई अन्य चाय कप वॉशिंग मशीन उपलब्ध नहीं है। जर्मनी से एक बियर कप वॉशिंग मशीन है जिसकी कीमत 1.5 लाख रुपये है।पहले तीन मशीनें फेल हो गईं लेकिन आखिरकार चौथी मशीन ढाई साल से अधिक बनाने में सफल रही है।

[ डि‍सक्‍लेमर: यह न्‍यूज वेबसाइट से म‍िली जानकार‍ियों के आधार पर बनाई गई है. Lok Mantra अपनी तरफ से इसकी पुष्‍ट‍ि नहीं करता है. ]

Dhara Patel

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