73 साल के रिटायर्ड हेडमास्टर ने हासिल की PhD, साबित कर दिया कि पढ़ाई की कोई उम्र नहीं होती

कहते हैं सीखने की, पढ़ने की कोई उम्र नहीं होती. अगर पढ़ने की इच्छा हो तो उम्र कुछ भी नहीं. तमिलनाडु के एक रिटायर्ड हेडमास्टर ने ये साबित कर दिखाया है.

ज़िला कन्याकुमारी, तमिलनाडु ने 73 की उम्र में डॉक्टरेट यानि PhD डिग्री हासिल की है. कन्याकुमारी के थिरपारप्पू  क्षेत्र के देवसम बोर्ड स्कूल  में टीचर और हेडमास्टर रह चुके थंगप्पन ने डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की.

आज से तकरीबन 15 साल पहले थंगप्पन रिटार हुए और अपनी पुश्तैनी ज़मीन पर काजू की खेती की. खेती-बाड़ी के दौरान भी थंगप्पन के अंदर पढ़ाई करने की भी इच्छा रही. गांधी जी के उसूलों में दिलचस्पी रखने वाले थंगप्पन के अंदर शिक्षा की भी ललक थी. जीवन में भी वो गांधी जी के उसूलों का पालन करते हैं. डॉक्टरेट की डिग्री प्राप्त करना भी उनकी एक ख़्वाहिश थी और इसीलिए उन्होंने मनोमनियम सुंदरानर यूनिवर्सिटी में रेजिस्टर किया और कोर्टल्लम पारस्कित कॉलेज  में प्रोफ़ेसर कनकम्बल के अंडर रिसर्च शुरु किया.

थंगप्पन ने आज आतंकवाद से भरी दुनिया में गांधी के उसूलों के महत्त्व पर रिसर्च किया. बीते 8 वर्षों से रिसर्च करने के बाद उन्होंने डॉक्टरेट प्राप्त किया. तमिलनाडु के गवर्नर आर.एन.रवि ने उन्हें डिग्री प्रदान की.

अविवाहित थंगप्पन का कहना है कि वो ताउम्र पढ़ाई करते रहेंगे. उनका कहना है कि सिर्फ़ गांधी के उसूल के ज़रिए ही आज आतंकवाद और नफ़रत को ख़त्म किया जा सकता है. समस्त देशवासियों को उन्होंने गांधी जी के उसूलों पर चलने की हिदायत दी. उनका कहना था कि शिक्षा पर कोई प्रतिबंध नहीं है और इसी के बदौलत विश्व में शांति की स्थापना की जा सकती है.

[ डि‍सक्‍लेमर: यह न्‍यूज वेबसाइट से म‍िली जानकार‍ियों के आधार पर बनाई गई है. Lok Mantra अपनी तरफ से इसकी पुष्‍ट‍ि नहीं करता है. ]

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