50 करोड़ साल पुराने तीन आंखों वाले ‘क्रूर शिकारी’ का मिला जीवाश्म, कभी समुद्र में थी इसकी दहशत

आपने बहुत से खतरनाक समुद्री जीवों के बारे में सुना होगा. लेकिन जिस जीव के बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं उसे बेहद ही खूंखार माना जाता था. इस खूंखार जानवर का वजूद आज से करोड़ों साल पहले का बताया जाता है.

इसकी सबसे बड़ी खासियत थी इसकी तीन आंखें. समुद्र में रहने वाले इस जानवर के फिन पंखों जैसे थे. यह जीव छोटे समुद्री जानवरों का शिकार किया करता था.

50 करोड़ साल पहले था ये जानवर

माना जाता है कि स्टेनलीकारिस हिरपेक्स नामक ये जानवर करीब 50 करोड़ साल पहले कैम्ब्रियन काल में पाया जाता था. यह आर्थ्रोपोड्स में पहला ऐसा जानवर है जिसकी तीन आंखे थीं.

बता दें कि आर्थ्रोपोड्स एक ग्रुप है जिसमें कीड़े, अरचिन्ड और क्रस्टेशियंस शामिल होते हैं, लेकिन शोधकर्ताओं को लगता है कि ऐसे और ग्रुप भी हो सकते हैं

जिनके जानवरों में तीसरी आंख हो, और जिन्हें अनदेखा किया गया हो. एक इंसान के हाथ के बराबर के आकार वाले इस जानवर के सिर के दोनों तरफ उभरी हुई दो आंखे होती थीं. इन आंखों में सैकड़ों लेंस लगे थे. इन दो आंखों के अलावा बीच में एक और आंख होती थी जो बाकी दोनों आंखों से काफी बड़ी थी.

मिले इसके सैकड़ों जीवाश्म

इस जानवर को लेकर कनाडा में टोरंटो यूनिवर्सिटी के जोसेफ मोयसियुक का कहना है कि यह जानवर उंगली के आकार के जानवरों के बीच रहता होगा और तेजी से चलने तैरने वाले शिकार का पीछा करने के लिए, अपने एडवांस विज़ुअल सिस्टम का इस्तेमाल करता होगा.

बता दें कि हाल ही में ब्रिटिश कोलंबिया के कैनेडियन रॉकीज में कैम्ब्रियन बर्गेस शेल से स्टेनलीकारिस हिरपेक्स के के सैकड़ों जीवाश्म मिले हैं. मोयसियुक और उनके सहयोगियों ने इन जीवाश्मों की जांच की है.

थीं तीन आंखें

इन जानवरों के संबंध में करंट बायोलॉजी एक शोध प्रकाशित किया गया. जिसके अनुसार ऐसे जीवाश्मों के 268 नमूनों में से कई ऐसे थे जिनमें अभी भी सॉफ्ट टिश्यू बरकरार थे. मोयसियुक का कहना है कि जीवाश्म वाली चटट्टान को अगर 50.6 करोड़ साल बाद भी धूप में रखा जाए तो इनकी आंखों को चमकते हुए देखा जा सकता है.

इसलिए यह बहुत स्पष्ट था कि इसकी तीन आंखें थीं इस जानवर के शरीर के 17 खंड थे. शरीर के निचले भाग के साथ दो जोड़ी कड़े ब्लेड लगे थे. इसके साथ ही इस जानवर के नुकीले पंजे बताते हैं कि यह एक क्रूर शिकारी था.

[ डि‍सक्‍लेमर: यह न्‍यूज वेबसाइट से म‍िली जानकार‍ियों के आधार पर बनाई गई है. Lok mantra से इसकी पुष्‍ट‍ि नहीं करता है.]

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