ग्रॉसरी स्टोर वाले ने मार्केटिंग में हेल्प मांगी तो आया आइडिया, झारखंड के सत्यजीत ने बनाया मोबाइल ऐप, 6 महीने में ही 3 करोड़ का टर्नओवर

ग्रॉसरी स्टोर वाले ने मार्केटिंग में हेल्प मांगी तो आया आइडिया, झारखंड के सत्यजीत ने बनाया मोबाइल ऐप, 6 महीने में ही 3 करोड़ का टर्नओवर

मान लीजिए आप किसी शहर में नए हैं, आपको अपनी लोकेशन के हिसाब से कपड़े की दुकान, मॉल, होटल या मेडिकल की जरूरत है। तो आप क्या करेंगे? आमतौर पर हम इसके लिए गूगल करते हैं। कई बार हमें जानकारी मिल जाती है, कई बार ऐसा भी होता है कि उस जगह पर मौजूद छोटी दुकानों के बारे में गूगल पर जानकारी उपलब्ध नहीं होती। इतना ही नहीं, अगर आप खुद का छोटा-मोटा बिजनेस, स्टार्टअप या दुकान चलाते हैं, लेकिन आपकी अच्छी कमाई नहीं हो पाती है, कस्टमर्स तक आपके प्रोडक्ट की जानकारी नहीं पहुंच पाती है।

इस परेशानी को दूर करने के लिए झारखंड के चाईबासा के रहने वाले सत्यजीत पटनायक ने एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की शुरुआत की है। उनके ऐप के जरिए देश के 40 शहरों में करीब 4 हजार छोटे-बड़े बिजनेस जुड़े हैं। महज 6 महीने में ही उन्होंने 3 करोड़ से ज्यादा का बिजनेस किया है।

24 साल के सत्यजीत ने 2019 में ओडिशा से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। बिजनेस को लेकर उनकी दिलचस्पी पहले से रही है। पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने अपने दोस्तों के साथ मिलकर इलेक्ट्रिक व्हीकल का स्टार्टअप शुरू किया था। हालांकि कुछ वक्त बाद वे किन्हीं कारणों से उस स्टार्टअप से अलग हो गए। इसके बाद वे पुणे चले गए और एक कंपनी में जॉब करने लगे। सैलरी और पोजिशन सबकुछ ठीक था, लेकिन उनके मन में खुद के बिजनेस की बात चल रही थी।

एक ग्रॉसरी स्टोर वाले के फोन से मिला स्टार्टअप आइडिया

सत्यजीत कहते हैं कि एक दिन मुझे ओडिशा से एक ग्रॉसरी स्टोर वाले का फोन आया। वहां पढ़ाई के दौरान मेरा उनसे परिचय था। उन्होंने मुझे बताया कि उनकी शॉप पर कस्टमर्स नहीं आ पा रहे हैं, इस वजह से उनकी कमाई नहीं हो पा रही है। उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि इसका प्रमोशन कैसे किया जाए? सत्यजीत कहते हैं कि मैं जिस बिजनेस आइडिया की तलाश में था वह मुझे मिल चुका था। मैंने तय किया कि अब इस आइडिया को हाथ से नहीं जाने देना है और मैं ओडिशा चला गया।

ओडिशा जाने के बाद सत्यजीत ने एक सर्वे शुरू किया। उन्होंने वहां के लोकल दुकानदारों और स्टार्टअप्स से बातचीत की। यह जानकारी जुटाई कि वे अपनी मार्केटिंग कैसे करते हैं? अभी कौन से प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रहे हैं? साथ ही उन्होंने कस्टमर्स से भी पूछा कि वे कोई चीज खरीदने के लिए किन-किन प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल करते हैं? इसके बाद इसी तरह का सर्वे उन्होंने झारखंड के भी कुछ जिलों में किया।

सत्यजीत कहते हैं कि अलग-अलग जगहों पर सर्वे और लोगों से बातचीत के बाद मैंने तय किया कि एक ऐसा प्लेटफॉर्म लॉन्च किया जाए, जहां छोटे स्टार्टअप्स, दुकानदारों के साथ ही कस्टमर्स को भी उनकी लोकेशन के हिसाब से मार्केट उपलब्ध हो सके। वे अपने मोबाइल पर ही अपने आसपास की दुकानों पर मिल रहे प्रोडक्ट और ऑफर के बारे में जान सकें।

पिता के साथ मिलकर शुरू किया स्टार्टअप

सत्यजीत कहते हैं कि मैंने अपने स्टार्टअप आइडिया को लेकर पापा से बात की। उन्हें भी यह आइडिया पसंद आया और वे खुद भी मेरे साथ काम करने के लिए तैयार हो गए। इसके बाद दोनों ने मिलकर 2020 के अंत में LFYD नाम से स्टार्टअप की शुरुआत की। इसके लिए उन्होंने एक मोबाइल ऐप लॉन्च किया, जिसमें अलग-अलग शहरों के दुकानों और स्टार्टअप्स को शामिल किया, उनके प्रोडक्ट को अपने ऐप पर अपलोड किया। इसके बाद अपने ऐप की मार्केटिंग करनी शुरू की, जगह-जगह बैनर पोस्टर लगवाए। इसमें करीब 10 लाख रुपए का उनका बजट लगा। जो उन्होंने अपने घर से इन्वेस्ट किए।

वे बताते हैं कि हमारे कस्टमर्स और दुकानदार ही हमारे लिए सबसे बड़े प्रमोशन के सोर्स हैं। उनकी माउथ पब्लिसिटी के जरिए ही हमारा दायरा तेजी से बढ़ता गया। एक ने इस्तेमाल किया और दूसरे को सजेस्ट करते गए, इसी तरह कस्टमर्स भी अपने साथियों के साथ हमारा ऐप शेयर करते गए।

इसी वजह से 6 महीने के भीतर ही झारखंड, महाराष्ट्र, ओडिशा, उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में 3500 से ज्यादा दुकानदार और 45 हजार से ज्यादा कस्टमर्स जुड़ गए। इनमें कई बड़े मॉल और ब्रांड भी शामिल हैं। फिलहाल हमारे पास 40 से ज्यादा शहरों में कस्टमर्स हैं। जल्द ही हम देशभर में अपना नेटवर्क पहुंचाने वाले हैं। सत्यजीत की टीम में फिलहाल 35 से 40 लोग हैं, इनमें से 7 लोग कोर टीम में शामिल हैं।

कैसे काम करता है यह ऐप?

सत्यजीत बताते हैं कि हमारे ऐप पर मर्चेंट यानी सेलर्स और कस्टमर्स दोनों के लिए मार्केटिंग का प्लेटफॉर्म है। अगर आप कस्टमर हैं तो सबसे पहले आपको ऐप डाउनलोड करने के बाद लॉगइन करना होगा। इसके बाद आपको कैटेगरी सिलेक्ट करनी होगी। आपके लोकेशन के हिसाब से वहां उपलब्ध दुकानों की पूरी डिटेल, प्रोडक्ट की कीमत और ऑफर के बारे में जानकारी मिल जाएगी। आप ऐप के जरिए प्रोडक्ट खरीद भी सकते हैं और पेमेंट भी कर सकते हैं। इतना ही नहीं हमारे ऐप पर कैशबैक ऑफर और कूपन की सुविधा भी उपलब्ध है।

वहीं अगर आप मर्चेंट है तो आपको सबसे पहले अपना अकाउंट क्रिएट करना होगा। इसके बाद उस पर आपके प्रोडक्ट और दुकान की डिटेल प्रोवाइड करनी होगी। इसके बाद हमारी टीम उसकी जांच करेगी, जरूरत पड़ी तो आपसे बातचीत भी करेगी और कुछ ही देर में आपका अकाउंट वैरिफाई हो जाएगा। फिर आप अपने प्रोडक्ट की मार्केटिंग कर पाएंगे।

आप अपनी पसंद के मुताबिक डिस्काउंट और ऑफर दे पाएंगे। इसके लिए आपको कोई चार्ज नहीं देना होगा। इतना ही नहीं इस ऐप के जरिए आप यह भी आसानी से जान पाएंगे कि आपके आस पास कौन सा कस्टमर्स किस चीज की तलाश कर रहा है, इससे आपको अपनी बिजनेस स्ट्रैटजी बनाने में आसानी होगी।

क्या है बिजनेस मॉडल, कैसे करते हैं कमाई?

कमाई के मॉडल को लेकर सत्यजीत बताते हैं कि हम मर्चेंट के लिए फ्री प्रोग्राम के साथ ही प्रीमियम प्रोग्राम भी चलाते हैं। इसमें मर्चेंट को एक्स्ट्रा सुविधा मिलती है। इसके तहत अगर कोई कस्टमर प्रोडक्ट खरीदता है तो उसका कुछ हिस्सा हम लेते हैं। इसके अलावा हमने कई छोटे बड़े स्टार्टअप और ब्रांड्स के साथ टाइअप किया है। हम उनके लिए चैनल पार्टनर का काम करते हैं। इसके अलावा कई कंपनियां और स्टार्टअप्स हमारे ऐप पर खुद का प्रमोशनल ऐड्स भी चलवाते हैं। इससे भी हमें अच्छा खासा रेवेन्यू हासिल हो जाता है।

अगर इस तरह के स्टार्टअप में आपकी दिलचस्पी है, तो यह स्टोरी आपके काम की है

जो स्टार्टअप छोटे होते हैं या जिनका बजट कम होता है, उन्हें खुद को एस्टैब्लिश करने में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। कई लोगों को स्टार्टअप शुरू करने के बाद सही मार्केट नहीं मिल पाता है और उन्हें अपना कारोबार समेटना भी पड़ता है। इस परेशानी को कम करने के लिए मध्य प्रदेश के रहने वाले अभिनव दुबे ने अपने दोस्त के साथ मिलकर एक स्टार्टअप की शुरुआत की है। वे छोटे-बड़े स्टार्टअप्स को मार्केटिंग से लेकर प्रमोशन तक हर स्टेज पर सपोर्ट करते हैं। अब तक वे 7 हजार से ज्यादा बिजनेस के लिए काम कर चुके हैं। एक साल के भीतर उन्होंने 40 लाख रुपए का बिजनेस किया है। (पढ़िए पूरी खबर)

[ डि‍सक्‍लेमर: यह न्‍यूज वेबसाइट से म‍िली जानकार‍ियों के आधार पर बनाई गई है. Lok Mantra अपनी तरफ से इसकी पुष्‍ट‍ि नहीं करता है. ]

Dhara Patel

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