अपने भी ऐसी सेवा न कर सकें! 18 साल के बच्चे 85% पैरालाइज्ड शख्स की 4 साल से कर रहे सेवा

सूरज और संगीत की उम्र 18 साल है. लेकिन, दोनों ही अपने पिता के लिए श्रवण कुमार से कम नहीं हैं. 39 साल के एसी दीपू मांसपेशियों की बीमारी से ग्रसित हैं. इडुक्की के रहने वाले दीप इसकी वजह से चलने-फिरने में भी असमर्थ हैं.

दीपू जब 20 साल के थे, तभी इस बीमारी की चपेट में आ गए. पेरेंट्स पर भार न बने, इसलिए उन्होंने घर छोड़ दिया और चेरतला रेलवे स्टेशन के पास किराए का कमरा लेकर रहने लगे. इस दौरान ही ये दोनों बच्चों उनकी सेवा करने लगे.

दीपू कहते हैं, मेरा 85% बॉडी पैरालाइज्ड है. वह लॉटरी टिकट बेचकर अपनी जिंदगी चला रहे हैं. मैं बिना किसी की मदद के एक इंच भी नहीं हिल पाता. लेकिन, निवर्थिल के रहने वाले सूरज सेतू और संगीत साजी पिछले कुछ वर्षों से उनकी सेवा कर रहे हैं.

रोज सुबह-शाम घर पहुंचते हैं

वह कहते हैं, दोनों बच्चे रोज सुबह-शाम मेरे घर आते हैं. दिनभर का काम करने के बाद वे दोनों मेरे मोडिफाइड स्कूटर पर लेकर मुझे घर पहुंचा देते हैं. ज्योति उन्हें ब्रेकफास्ट देती है तो सीना लंच.

20 साल की उम्र में हुई तबीयत खराब

दीपू कहते हैं, जब वह एक मिनी लॉरी चला रहे थे, तभी उन्हें सिंपटम डेवलप हुआ. उनके पेरेंट्स अस्पताल में इलाज कराने की कोशिश किए, लेकिन महंगा इलाज होने की वजह से बीच में ही छूट गया. 23 साल की उम्र में बीमारी बढ़ गई और दीपू एक अनाथालय में शिफ्ट हो गए. वहां 8 साल रहने के बाद वह कुछ दोस्तों की मदद से बाहर निकले.

सूरज कहते हैं, मैं और संगीत उनकी मदद करते हैं. अगर किसी दिन हम दोनों उनकी मदद नहीं कर पाते हैं तो हमारे दूसरे दोस्त चले जाते हैं. उनकी दुखभरी जिंदगी में हम लोग उनकी मदद कते हैं.

[ डि‍सक्‍लेमर: यह न्‍यूज वेबसाइट से म‍िली जानकार‍ियों के आधार पर बनाई गई है. Lok Mantra अपनी तरफ से इसकी पुष्‍ट‍ि नहीं करता है. ]

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